11/07/2026
अब्बास के जो नहर पा बाज़ू क़लम हुए
सदमे से इब्ने हैदरे करार ख़म हुए
सिब्ते रसूल मुरदे रंजो अलम हुए
आवाज़ दी हुसैन को मजरूह हम हुए
खूं मे तड़प तड़प के ये ग़मखार रह न जाए
ये फ़िक्र है के हसरते दीदार रह न जाए
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सुनते हे इस सदा के शाकिस्ता हुई कमर
तड़पे उठे गिरे न संभाला गया जिगर
कापे जो पाऊं थाम लिया बाज़ुए पिसर
चिलाते थे कहो अली अकबर चले किधर
खुर्शीद क्यों छिपा है ये क्या वारदात है
कुछ सूझता नहीं हमें दिन है के रात है
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ग़ुरबत मे लुट गया मेरा घर ऐ जवान पिसर
सीधी न होगी अब ये कमर ऐ जवान पिसर
ताज़ा है आज दाग़े पिसार ऐ जवान पिसर
काटा गया छुरी से जिगर ऐ जवान पिसर
अब्बास क्या जहाँ से गये मै गुज़र गया
भाई हुआ शहीद हुसैन आज मर गया
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क़रता है अर्ज़ बाप को थामे हुऐ पिसार
दिल को ज़रा संभालिये या शाहे बहरोबर
ज़िंदा अभी है हज़रते अब्बासे नामवर
घबराए न अब है तराई करीब तर
खादिम उठाएगा जसदे पाश पाश को
चलिए हरम मे लेके बहिश्ती की लाश को
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जिस दम करीब लाश के लाये हुसैन को
अब्बास जॉ बलब नज़र आये हुसैन को
जर्रार सुनके तड़पा सदाए हुसैन को
अकबर ने हाथ उठा के दिखाए हुसैन को
दो कोह ग़म के दिल पा जो एक बार गिर पड़े
पहलू मैं लाश के शाहे अबरार गिर पड़े
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भाई की लाश भाई ने देखी जो खून मे तर
उमड़ा ये दिल के मुँह के करीब आ गया जिगर
बोले ये आँख खोलकर अब्बासे नामवर
अकबर संभालो किब्लए आलम को बैठकर
सड़के हज़ार जान इमामे गय्यूर के
मुझको उठाके गिर्द फिराओ हुज़ूर के
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ये कहके पाए शाह की जानिब बढ़ाया सर
कापे लहू भरी हुई आँखों को खोल कर
टपके मिजासे खून के खून के कतरे इधर उधर
किस यास से हुसैन पा की आखरी नज़र
मनका जारी का ढल गया भाई की गोद में
भाई का दम निकल गया भाई की गोद में