07/10/2021
#मतला
अली का ओढ के लहजा अली की बेटी ने।
सितम को कर दिया रुसवा अली की बेटी ने।।
#हुस्ने_मतला
बिछा के फर्श अज़ा का अली की बेटी ने।
यज़ीदे शाम को मारा अली की बेटी ने।।
यज़ीदे शाम के मक़सद को मौत आने लगी।
क़दम जो शाम में रक्खा अली की बेटी ने।।
सिना पा असग़रे बेशीर मुस्कुराने लगे।
गुरुरे ज़ुल्म जो तोड़ा अली की बेटी ने।।
बचा के बाकिरो आबिद को घर तलक लाई।
किया है काम ये तन्हा अली की बेटी ने।।
क़सम हुसैन की बैयत के हाथ काट दिए।
अलम उठा के जरी का अली की बेटी ने।।
फुरात छीनी है रन में अली के बेटे ने।
किया है शाम पा क़ब्ज़ा अली की बेटी ने।।
जहां नहीं था तसव्वुर किसी इबादत का।
वहां बिछाया मुसल्ला अली की बेटी ने।।
सक़र में कांप रहे हैं यज़ीद के अजदाद।
किया है शाम पा हमला अली की बेटी ने।।
खतीबे नोके सिना ने कहा की जीती रहो।
दिया जो गैज़ में ख़ुत्बा अली की बेटी ने।।
झुकाए बैठा है सर क़ातिले अली असग़र।
ज़लील कर दिया इतना अली की बेटी ने।।
मेरे हुसैन न छोड़ूगी तेरे क़ातिल को।
किया है भाई से वादा अली की बेटी ने।।
यज़ीद तेरी भी औक़ात जान ली सब ने।
बयान कर दिया शजरा अली की बेटी ने।।
सितम के घर में बिछाऊगी फर्श मजलिस का।
ये कर लिया है इरादा अली की बेटी ने।।
सुबूते फ़तहे हुसैनी नहीं तो फिर क्या है।
पढ़ा है शाम में नौहा अली की बेटी ने।।
यज़ीद देख हर एक दिल में बस गए हैं हुसैन।
तेरा निशाँ भी न छोड़ा अली की बेटी ने।।
ये और बात के हाथों में रस्सियाँ थी मगर।
खुदा का ज़िक्र ना छोड़ा अली की बेटी ने।।
#मक़ता
क़ुबूल कर के दुआओं को ऐ "शरर नक़वी"।
करम किया है हमेशा अली की बेटी ने।।
शायर:- जनाब शरर नक़वी साहब
तर्ज़ निगार:- जनाब रिज़वान साहब